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अपठित गद्यांश

अपठित गद्यांश

Assessment

Presentation

•

Other

•

7th - 9th Grade

•

Hard

Created by

RAJANI MANNAN

Used 9+ times

FREE Resource

10 Slides • 0 Questions

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अपठित गद्यांश

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कड़ी मेहनत और दिन-रात भट्टे में जलती आग के बाद जब भट्ठा खुलता था तो मज़दूर से लेकर मालिक तक की बेचैन साँसों को राहत मिलती थी। भट्टे में पकी ईंटों को बाहर निकालने का काम शुरू हो गया था। लाल-लाल पक्की ईंटों को देखकर सुकिया और मानो की खुशी की इंतहा नहीं थी। खासकर मानो तो ईंटों को उलट-पुलटकर देख रही थी। खुद के हाथ की पक्की ईंटों का रंग ही बदल गया था। उस दिन ईंटों को देखते-देखते ही मानो के मन में बिजली की तरह एक ख्याल कौंधा था। इस ख्याल के आते ही उसके भीतर जैसे एक साथ कई-कई भट्टे जल रहे थे। उसने सुकिया से पूछा था, “एक घर में कितनी ईंटें लग जाती हैं?”


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प्रश्नः

1. भट्ठा मज़दूरों और मालिक को कब आराम मिलता है ?

2. सुकिया और मानो की खुशी का कारण क्या था?

3. उसके भीतर जैसे कई-कई भट्ठे जल रहे थे।-आशय स्पष्ट कीजिए।

4. मानो ने सुकिया से क्या पूछा और क्यों पूछा होगा?

5. ‘राहत’ और ‘इंतहा’ शब्दों का अर्थ लिखिए।

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